जानिए RRTS क्या है | RRTS Full Form In Hindi Leaked on hdhub4u, movievarse and Telegram

देश का सबसे पहला RRST सिस्टम दिल्लीमेरठ-गाजियाबाद के बीच में स्थापित किया जा रहा है, ताकि यहां के लोगों को ट्रेवल सिस्टम में आसानी हो सके और यह अपने व्यापार को आगे बढ़ा सके। इसके अलावा भी कई और शहरो में भी इस तरह के सिस्टम लागू किये जाने है, जिसको लेकर भारत सरकार से अप्रूवल मांगे गये हैं और जल्द ही यह प्रणाली अन्य शहरों में भी संचालित हो सकती है।

इस ट्रैक पर लगभग 180 किलोमीटर प्रति घण्टा की स्पीड से गाड़ी चल सकती है और इस ट्रैक पर केवल Rrts की ही गाड़ी चलेगी, तो फिर ट्रेफिक का भी कोई झंझट नहीं रहेगा। इसके अलावा इस ट्रैक पर हाईस्पीड ट्रेन ही दौड़नी है तो फिर चिन्ता किस बात की है, तो चलिए जानते है Rrts प्रोजेक्ट क्या है और कैसे काम करेगा?

क्या है RRTS Project

यह एक रेल लाइन यातायात का माध्यम है, जो न सिर्फ दो शहरों के बीच जोड़ा जाता है, बल्कि उनके लिए उचित परिवहन का काम करता है। इसको संचालित करने के लिए National Capital Regional Transport Corporation (NCRTC) एक निजी संस्था को दायित्व सौंपा गया है।

यह संस्था इस रेलवे लाइन के लिए एलीवेटर युक्त ट्रैक का भी निर्माण करती है, साथ ही इस ट्रैक पर कोई अन्य संस्था की गाड़ी संचालित नहीं की जाती है। इस पर केवल नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांस्पोर्ट कॉरपोरेशन(NCRTC) की ट्रेन ही चल सकती है। साथ ही एक लम्बी दूरी को तय करने के लिए RRTS सिस्टम को लागू किया गया, ताकि लोग आसानी से Travel कर सके और economy को बढ़ाया जा सके। इस पर तेज गति से चलने वाली ट्रेन से लोगों को आवागमन में भी काफी लाभ होगा, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक से भी मुक्ति मिल सकेेगी। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा इसका गठन किया गया है।

इस संस्था के गठन से यातायात के माध्यम को भी एक नया आयाम मिला है, ताकि जल्द से जल्द इसका निर्माण कराया जा सके। इसके अलावा भी मेट्रो और लोकल ट्रेनों के अलावा भारत सरकार के ट्रैक पर अन्य गाड़िया जैसे Rrts और Bullet Train दौड़ती नजर आती है, लेकिन इस ट्रैक पर केवल Rrts की गाड़ियां ही चल सकेगी।

Full Form of RRTS

Regional Rapid Transit System (RRTS) रेलवे द्वारा संचालित की जाने वाली नई तकनीकि में अब इसका भी नाम शामिल हो गया है। इससे पहले हम मेट्रो और लोकल को ही आधुनिक भारत का परिचय मानते थे, लेकिन अब तक इससे भी आगे आ चुके हैं, साथ ही इसमें न सिर्फ रेलगाड़ी संचालित की जा रही है, बल्कि यह एक माध्यम है, जो आपको एक नये आयाम की ओर ले जाती है।

RRTS का फूल फॉर्म है Regional Rapid Transit System(रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम) इस प्रणाली में हमें तीव्र गति से चलने वाली गाड़ियों के बारे में भी बताया जायेगा, साथ ही इसकी आधुनिकता को भी जोड़ा जायेगा, जो न सिर्फ उन लोगों के लिए है, जो जॉब, प्रोफेशनल और कागकाजी हो, बल्कि इसमें आम और खास सभी वर्गाें के लिए देखा जायेगा। आधुनिक भारत की अग्रसर होता एक नया कदम।

इसमें भारत सरकार द्वारा उचित ध्यान दिया जा रहा है, ताकि देष की तरक्की में नये लेख लिखे जा सके। अभी भी कुछ शहरों की दूरी को कम करने के लिए इसका निर्माण किया जा रहा है, जो देश की राजधानी दिल्ली से शुरू होकर अन्य बड़े शहरों से भी जुड़ सकेगा।

आखिर क्यो पड़ी RRTS की जरूरत

जब बड़े शहरों का विकास होता है, तो उससे जुड़े अन्य छोटे शहरों का विकास भी खुद व खुद होने लगता है। फिर चाहे वहां पर कोई सिस्टम हो या न हो। इसके अलावा अन्य देषों की अपेक्षा ट्रेन सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए एक सकारात्मक पहलू तैयार किया गया है, जैसे जापान मे ट्रेन सिस्टम इसके उलट ही है, हमारे देश में ट्रेनों में लगभग 20 जनता सफर करती है। वहीं जापानी ट्रेनों की मिसाल पूरे विश्व मे दी जाती है, ताकि लोगो को पता चल सकेे कि वहां पर ट्रेनों की स्पीड कितनी है और कितने समय में देरी से चल रही है।

वहीं हमारे देश में मेट्रो और लोकल को छोड़ दिया जाये तो भारतीय रेल व्यवस्था के बारे में हर कोई जानता है, कि कौन सी ट्रेन कितनी लेट आती है और क्यों। इसे हम उदाहरण के तौर पर देखत हैं कि जैसे भारत में दिल्ली एक विकसित शहर है, इसके अलावा भी इसके साथ-साथ गुड़गांव, गाजियाबाद, मेरठ, फरीदाबाद, नोएडा में खुद व खुद विकास हो गया और अब तो यहां दिल्ली से भी ज्यादा उद्योग स्थापित किये गये, क्यों दिल्ली में उतनी जगह नहीं थी, जितनी की आसपास के छोटे शहरों में थी।

इसके तहत अब लोग इन शहरों में व्यापार केे लिए यातायात का उपयोग कर रहे है। इस सब में उनका समय व धन दोनों ही बर्बाद होते है। हालांकि इसके अलावा मेट्रो का भी Option था, लेकिन मेट्रो ज्यादा दूरी तरह नहीं कर सकती थी, इसी को ध्यान में रखते हुए RRTS का गठन किया गया।

RRTS और Metro Train में अन्तर

वैसे तो ये दोनों ही यातायात के उचित माध्यम है और समय की बर्बाद को भी कम करते हैं, इसके अलावा भी इनमें काफी अन्तर है। इन ट्रेनों को भी सरकार द्वारा एकीकृत न करते हुए अलग-अलग नाम देकर अलग-अलग सिस्टम तैयार कर दिया है, ताकि अन्य बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों का भी विकास हो सके।

Rrts में विकासित शहर को केन्द्र बनाकर उससे सटे छोटे शहरों को जोड़कर उन्हें यातायात के उचित साधन उपलब्ध कराना रहता है, साथ ही इसकी कम से कम दूरी 50 किमी है, जिससे कि कई शहरों को जोड़ा जा सके, इसी के तहत देष के पहले आरआरटीएस में दिल्ली-मेरठ-गाजियाबाद को जोड़ा गया है। वहीं मेट्रो के लिए यह दूरी तय करना लगभग नामुमकिन है, इसमें कम दूरी पर स्टेशन बनाये जाते है, साथ ही एक बड़े शहर के छोटे-छोटे मोहल्लों को इसमे जोड़ा जाता है। जैसे दिल्ली के कई मोहल्लों में इसको जोड़ा गया है।

जैसे कष्मीर गेट, आजादपुर, मण्डी हाउस, आईएनए, द्वारिका, राजीव चौक, छावरी बाजार, जनकपुरी वेस्ट, चांदनी चौक, द्वारिका सेक्टर 21, कीर्ति नगर, इन्द्रलोक, एम्स, आदर्ष नगर दिल्ली, रजोरी गार्डन, ग्रीन पार्क, गुरू द्रोणाचार्य जैसे मोहल्लों को जोड़ा गया है। इसी के मद्देनजर इन स्टेशनों को जोड़ा जा सकता है। वहीं मेट्रो के लिए अलग से एलीवेटर लगाये जाने है, तो उसमें मेट्रो दूरी तय नहीं कर सकती है।

Rrts को एक खास डिजायन से तैयार किया गया है, जिससे कि दूरी तय की जा सके और लोगों को आसानी से अप-डाउन करने में परेशनी न हो। इसी के लिए सबसे पहले देश की राजधानी दिल्ली में इसका कॉरिडोर का निर्माण किया गया, ताकि इससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, पलवल, मेरठ, गुड़गांव आदि को जोड़ा जा सके। वहीं मेट्रो में खर्चा भी ज्यादा आता है और स्पीड भी आरआरटीएस के मुकाबले कम है, जो सिर्फ 80 किलोमीटर प्रति घण्टा की स्पीड से भाग सकती है, वहीं Rrts Train की स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घण्टा के हिसाब से आंकी गयी है।

इस प्रोजेक्ट में किसकी कितनी हिस्सेदारी

Regional Rapid Transit System(Rrts) प्रोजेक्ट में केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी पूरा ध्यान दे रही है, ताकि उनके शहरों मंे भी विकास तेजी से हो सके और एक उज्जवल भारत का निर्माण हो सके। इसी के तहत आरआरटीएस में केन्द्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एण्ड अर्नबन अफेयर 22.5 प्रतिशत, मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे 22.5 प्रतिशत, नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड 5.0 प्रतिषत अपनी हिस्सेदारी रखते हैं।

साथ ही जिन शहरों में Rrts System लगाया जा रहा है, उनके राज्य भी इसमें हिस्सेदारी रखते है, जो इस प्रकार है एनसीटी दिल्ली सरकार 12.5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश सरकार 12.5 प्रतिशत, राजस्थान सरकार 12.5 प्रतिशत, हरियाणा सरकार 12.5 प्रतिशत अपना हिस्सा रखती है। अब हम आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट में इतने विभाग और इतनी राज्य सरकारों के शामिल होने के बावजूद भी यह प्रोजेक्ट कम समय में भी पूरा होने वाला है।

यह हमारे देश केे लिए एक अच्छी बात है। हालांकि अभी कुछ राज्यों द्वारा इसका फण्ड नहीं दिया गया है, इसके बावजूद भी भारत सरकार द्वारा काम जोरों पर चलाया जा रहा है, साथ ही समय रहते इसका पेमेंट भी हो जायेगा। गौरतलब बात तो यह है कि इस प्रोजेक्ट को कई शहरों के बीचों-बीच से गुजारा जाना है, फिर ऐसे में प्रोजेक्ट में पैसे की कमी आगे आये ऐसा कैसे हो सकता है।

शहरों के औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गयी है, हालांकि अभी तक काम नहीं पूरा नहीं हुआ है और विशेषज्ञों द्वारा इस निर्माण कार्य को पूरा होने मे लगभग 2023 तक का समय बताया जा रहा है। इसके अलावा अन्य राज्यों से भी मंजूरी लेकर अन्य प्रोजेक्ट को भी वर्ष 2035 तक पूरा करना है।

चीन की कम्पनी कर रही निर्माण कार्य

Rrts Project को पूरा करने के लिए भारत सरकार द्वारा एक चीनी कम्पनी को इसका ऑर्डर दिया गया है। जो न सिर्फ फुर्ती में काम कर रही है, बल्कि समय पर इस अनुबन्ध को पूरा करना भी एक चुनौती है। इसके निर्माण के समय से ही चीनी कम्पनी के उच्चाधिकारी इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दिन रात एक कर रहे है।

इसके अलावा बीच में कयास लगाये जा रहे थे कि भारत सरकार चीनी कम्पनी से इस प्रोजेक्ट को छींन सकती है, लेकिन अभी तक यह स्थिति स्पष्ट तौर पर साफ नहीं हो पायी है। फिलहाल काम जोरों पर चल रहा है और योजनाबद्ध तरीके से निर्माण किया जा रहा है।

आज आपने क्या सीखा

मै आशा करता हु की आपको हमारी यह पोस्ट जानिए RRTS क्या है, Rrst Full Form In Hindi जरूर ही पसंद आई होगी और इस पोस्ट को पड़ने के बाद आप समझ ही गए होंगे की रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम क्या होता है।

अगर आपके मन मे कोई Doubt या समस्या हो तो हमे Comment कर पुछ सकते है या कोई जानकारी जो की इस article मे नहीं है वो भी कमेन्ट मे बता सकते है। आप सभी लोगों से मेरी गुज़ारिस है की इस Article को पड़ने के बाद आप इसे अपने रिस्तेदारों, आस-पड़ोस के लोगों और दोस्तों तक जरूर शेयर करे ताकि वे लोग भी इस जानकारी का फायदा उठा सके।

 

Leave a Comment